बेटा और बेटी

ये दर्द की दास्ताँ नहीं
ये हमारी जिंदगानी है
एक भूल हुई हमसे ये हमारी नादानी है
भूल ये हुई की बेटी खेली मेरे आँगन मैं
अब मिटा दिया तूने अपने दमन से
ऐसा क्यों ऐसा क्या हुआ
कि तूने यह कदम उठाया
पैदा होते ही तूने मिटटी मैं सुलाया
अभी तो दुनिया देखि नहीं थी
लेकिन फिर भी क्यों पड़ा दर्द सहने
बेटे की चाहत मैं बेटी को भूल गया तू
बेटी का अस्तित्व नहीं तो तुम्हारा वंश नहीं
और वंश नहीं तो तुम्हारा अंश नहीं
बेटी माँ दुर्गा है तो माँ काली भी
माँ बनकर तुम्हे सम्भाला भी
अब सब बराबर है बेटा बेटी
अब सब को बराबर दो दाल रोटी

संतोष कुमार
990712713

4 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 08/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 08/07/2016

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