मैं

“मैं जो हूँ ,सो हूँ…
क्या पर्दा तुमसे करूँ!!

नहीं ऊंच नीच का ज्ञान मुझे,
न जात मज़हब का भान मुझे,

फ़र्क न जानू बड़े छोटे का,
कहूँ क्या मैं खरे खोटे का,

बात कहूँ बस सीधी सादी,
समझ जाये जो आज़ादी,

मानवता का प्रेमी बनकर,
प्रकृति का एक स्नेही बनकर,

जीव जगत में समाहित हो रहा,
मैं हर जीवन में प्रवाहित हो रहा,

मैं हर जीवन में प्रवाहित हो रहा…”

-हरेन्द्र पंडित
05 जून 2016