“मंथन”

बादलों की चादर ओढ़े
आजकल वह बीमार सा दिखता है
हल्के नीलेपन संग
छिटपुट अश्रुकण यत्र-तत्र बिखरे
गीलेपन का अहसास दिलाते हैं ।

बावरा मन, मन का क्या ?
मन तो खानाबदोश है
कितनी बार समझाया
पुरातन आवरण उतार देखो
सुनहरी धूप की चमक तीखी है ।

बर्फ भी पिघलने लगी है
मन की गाँठें खुलने लगी हैं
कागज के पुल बनने लगे हैं
रिश्तों की गठरी खोल दो
उसे भी अपनेपन की धूप दो ।

“मीना भारद्वाज”

21 Comments

  1. सोनित 07/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  2. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 07/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/07/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  6. babucm C.m.sharma(babbu) 07/07/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  8. mani mani 07/07/2016
  9. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  10. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 07/07/2016
  11. ALKA प्रियंका 'अलका' 11/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 03/08/2016
  12. Rinki Raut Rinki Raut 11/07/2016
    • Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 03/08/2016

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