कुशक्षत्रप की कलम से

गर तन भूखा हो तो चादनी रात बुरी लगती है
दिल पर हो आघात तो हर बात बुरी लगती है
कितना भी करो सावन की फुहारों का वर्णन यारों
महबूब न हो साथ तो बरसात बुरी लगती है ।।।।

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  3. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  5. mani mani 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016
  8. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 07/07/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 07/07/2016

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