पेड़ और मै……

सूरज ने उन्हे जलाने की कोशिश की मगर
मै उन पर बादलों की छाँव करता चला गया
मै हर डगर पर पेड़ लगाता चला गया
सड़क चौड़ी करने के लिये अधिकारी
हरियाली को उखाड़ता चला गया
मै फिर भी किनारों पर पेड़ लगाता चला गया
अपने रहने के लिये आज इंसान जंगलों का
सफाया कर वहाँ शहर बसाता चला गया
मै फिर भी शहर के बीच पेड़ लगाता चला गया
अपने चूल्हे की आग सेंकने की खातिर
वह पंछियों के घोंसले उजाड़ता चला गया
मै उनके लिये फिर से आंसियां बनाता चला गया
ऊंची इमारतों से इंसान बौने पौधों पर
अपने घर का कचरा डालता चला गया
मै उनके लिये हर मंजिल पर पेड़ लगाता चला गया
यूं तो पर्यावरण अब दूषित हो चला है
इंसान फिर भी कृत्रिम हवा लेता चला गया
मै पर्यावरण बचाने हर आंगन मे पेड़ लगाता चला गया
भगवान ने जो प्यारी सृष्टि दी है हमे
मै उसे हर खतरे से बचाता चला गया
मै हर जगह हरियाली का बीज बोता चला गया

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/07/2016

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