प्यार की पताका

गुलाबी रंग से
होंठ लाल कर
जब तुम मुड़कर
मुस्कराती हो
फूलों की सुगंध
मेरी ह्रदय मे उतर जाती है

काली मेघा जैसी
खुली केश, जब
हवा से हिलती है
मेरे हृदय की बागवान में
प्यार की फूल खिलने लगती हैं

जंगली हिरण जैसी
यैावन की चंचलता
जब तुम दिखाई
प्यार का पताका
मेरे मन की मैदान में
फहरने लगता है.

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