जब भी कोई….

जब भी कोई
पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाता है
उसका दर्द
मेरे हृदय को लगता है

पेड़ की पत्ता
जैसे कविता की पन्ने
और कविता की पन्ने
जैसे बच्चे की हँसी

जब भी कोई
जहाँ कही भी
पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाता है
दर्द मुझे महसुस होता है
और पेड़ की पत्ते के साथ
बच्चे की हँसी भी
मुरझा जाती है.

2 Comments

  1. vinay kumar vinay kumar 06/07/2016

Leave a Reply