दिल्ली गुम हो गयी………..मनिंदर सिंह “मनी”

दिल किया आज दिल्ली नगरी घूम आये,
कैसी है मेरे देश की राजधानी चलो देख आये ?
एक दम कठिन समस्या सामने खड़ी हो गयी,
ऐतिहासिकता, राजनीती का गढ़ दिल्ली गुम हो गयी,
बहुत पूछा मैंने दिल्ली का पता, हर कोई बेखबर,
ऐसा लगा मानो दिल्ली ख्वाब सा भ्रम हो गयी,
लगता है शहर में नए आये हो, भाई साहिब,
जाना है आपको दिल्ली सुन,थोड़ी हिम्मत सी हो गयी,
एक अधखड सा आदमी,देख मुझे हस रहा,
दिल्ली तो ना जाने कितने टुकड़ो में बट गयी,
कभी घोटालो का शहर. कभी समस्याओं का कहर,
बन अपनों के हाथो में, बड़ी बेदर्दी से लुट गयी,
कही समाधियों का डेरा, किसी ने नाजायज़ जगह को घेरा,
घर ख्वाब बन गए, कीमतें बेहिसाब बढ़ गयी,
हुनर अपना सड़कों पर करता तमाशा भूख की बेबसी से,
बहार से हुनर लेने, उड़नतस्तरी हर रोज यहाँ से उड़ गयी,
कही रेप, कही गुंडगर्दी, कही शबाब का खेल खेला जाता,
लगता जैसे शर्म-शार हो दिल्ली कही और कूच कर गयी,
दिल किया आज………………………..

14 Comments

    • mani mani 06/07/2016
  1. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 06/07/2016
    • mani mani 06/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
    • mani mani 06/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2016
    • mani mani 06/07/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 06/07/2016
  5. mani mani 06/07/2016
  6. babucm C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
    • mani mani 07/07/2016
  7. आदित्‍य 07/07/2016
    • mani mani 07/07/2016

Leave a Reply