अपनी तो हार में

अपनी तो हार में भी जीत नज़र आती है
वो लमहा ख्वाब का हो गया तीतर बितर
अब तो एक हसरत पुनीत नज़र आती है
अपनी तो ….

वो बुलंद इमारत ढह गयी आदर्शों की
यादों के कंक्रीट में नई रीत नज़र आती है
अपनी तो ……

बीज बोया था अमन चैन का
पर यहाँ तकरार में भी प्रीत नज़र आती है
अपनी तो …….

काँटे ही काँटे बिखरे थे जिस राह में
वर्षों पुरानी मन मीत नज़र आती है
अपनी तो हार में भी जीत नज़र आती है

डॉ.सी.एल.सिंह

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2016
    • Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 06/07/2016
  3. सोनित 06/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 06/07/2016
  5. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 06/07/2016

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