कवि हूँ,मैं! तूँ, मेरी कविता

कवि हूँ,मैं! तूँ, मेरी कविता,
तुझे हर एक शेर-ओ-शायरी में, मैं ही पिरोता।

लिखूँगा हरदम, हर पल, हर घड़ी,
ये कागज़-कलम खत्म नहीं होता।

होगी वो स्याही आखिरी, ये सांस आखिरी, उसके बाद मैं न लिखूँगा।

दिखूँगा हर पल, हर दम, हर घड़ी,
पर तेरे पास मैं न रहूँगा।

मर भी जाऊँगा, बेसक! मरना ही है।

अमर कर जाऊँगा, अमर हो जाऊँगा, तूँ! मेरी कविता है।।
कवि-भागचन्द अहिरवार “निराला”DSC0~2

9 Comments

  1. mani mani 06/07/2016
  2. Bhagchand Ahirwar Bhagchand Ahirwar 06/07/2016
  3. babucm babucm 06/07/2016
  4. Bhagchand Ahirwar Bhagchand Ahirwar 06/07/2016
  5. babucm babucm 06/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/07/2016
  7. chandramohan kisku chandramohan kisku 06/07/2016
  8. Bhagchand Ahirwar Bhagchand Ahirwar 06/07/2016
  9. Bhagchand Ahirwar Bhagchand Ahirwar 06/07/2016

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