आओ तो सही

हमें किसी की जरुरत है ,आओ तो सही
घर बिखरा पड़ा है अर्सो से ,सजाओ तो सही |

बेवजह जल रहा है हर अंग जुगनुओ सा
एक-एक करके उनके आग बुझाओ तो सही |

सबसे रंजिश पालने पे क्यों तुला है तू
अपने अंदर के दर्प को ख़ाक में मिलाओ तो सही |

मंज़िल दूर नहीं अब बस मिलने वाली है
अपने अंदर हौसलों का आग जलाओ तो सही ।

सब तुम्हारे पीछे घूमते रहते हैं बेखबर
अब अपने हुस्न-ए-किफ़ायत पे इतराओ तो सही ।

चुटकियों में हल निकालना जानता हुँ मैं
अपनी सारी उलझनों को बताओ तो सही |

इससे बढ़िया और कोई मिलन ही नहीं होगा
अपने दिल को मेरे दिल से मिलाओ तो सही |

4 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/07/2016

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