॥ योगेश्वर वन्दना ॥

श्रीकृष्ण 26

हे जगदगुरू हे जगपिता, तुम जग के तारनहार हो ।
संसार की नैय्या के तुम ही, मात्र खेवनहार हो ॥१॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
बन्धु तुम्ही हो, सखा भी तुम, तुम ही हो माता, पिता तुम ।
तुम से सकल जग व्याप्त है, इस सृष्टि के कारण हो तुम ॥२॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
जीवन जगत में तुमसे है, संहारकर्ता हो तुम्हीं ।
इच्छामयी इस सृष्टि के, पालनकर्ता हो तुम्हीं ॥३॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
तुम हो सभी में व्याप्त, तुमसे ही सकल जग फूलता ।
उत्पत्ति तुमसे, प्रलय तुमसे, संहार तुममें झूलता ॥४॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
सबके ह्र्दय में वास करते, सब तुम्हें ही पूजते ।
देव, मानव, ऋषिगण, सर्वत्र तुमको ढूँढते ॥५॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
सूर्य, चन्द्र में प्रकाश तुम, वेदों में प्रवणाक्षर तुम्हीं ।
सरिताओं में सुरसरि तुम्हीं, मंत्रों में गायत्री तुम्हीं ॥६॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
देवों का देवत्व तुमसे है, भूतों के जीवन में तुम्हीं ।
पृथ्वी में गंध तुम्हीं से है, जल में हो रस बनकर तुम्हीं ॥७॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
अज्ञानहर्ता, ज्ञानदाता, परब्रह्म, पुरूषोत्तम तुम्हीं ।
ज्ञानियों के ज्ञान तुम ही हो, तपस्वियों के तप भी हो तुम्हीं ॥८॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
देवों में देवेन्द्र हो तुम्हीं, नक्षत्रों में तुम चन्द्रमा ।
वेदों में सामवेद हो तुम्हीं, हो प्रकाश में तुम पूर्णिमा ॥९॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
ऋषियों में नारद तुम ही हो, गन्धर्वों में चित्ररथ हो तुमहीं ।
सिद्धों में कपिल तुम ही हो, वृक्षों में अश्रव्त्थ हो तुम्हीं ॥१०॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
हो गज में ऎरावत तुम्हीं, अश्वों में उच्चश्रवा तुम्हीं ।
इस जग में जो भी दृश्य है, सब तुममें है, सब में तुम्हीं॥११॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
जान पाया जो तुम्हें, वह तुम्हींमय हो गया ।
वासना हटी, चिंता मिटी , वह तुममें ही है खो गया ॥१२॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
किस विधि तुम्हारे गुण कहूँ, बुद्धि की सीमा चुक गई ।
जो तुमने कहलाया कहा, लेखनी मेरी अब रूक गई ॥१३॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
बिन माँगे सब कुछ पा लिया , सब तुम्हारा ही तो प्रसाद है ।
इच्छा तुम्हारी सर्वोपरि, मन में न तनिक विषाद है ॥१४॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
समर्पण करो स्वीकार मेरा, भावना को दृढ़ करो ।
कर्तव्य पथ के इस पथिक का, पंथ और सुदृढ़ करो ॥१५॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…
सर्वत्र व्याप्त हे जग प्रभो, तुम्हें बारम्बार प्रणाम हो ।
वृत्ति मेरी हो सात्विक, भक्ति मेरी निष्काम हो ॥१६॥
हे जगदगुरू हे जगपिता…

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 05/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016
    • अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव aklesh1960 15/07/2016

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