मेरी कल्पना

एक ऐसे भारत की कल्पना करती हूँ..
जिसे कभी गाँधी के सपनों ने संजोया था
उसको पूरा करने के लिए शहीदों ने प्यार का बीज बोया था….!
ऐसे भारत की चाहत में न जाने कितनी माओं ने अपना बेटा खोया था!
जिस भारत को पाने की खातिर फांसी झूले सैनानी
जिन्होंने लड़ते लड़ते गौरो को याद दिला दी नानी
मर्दों के भी छक्के छुड़ा दे ऐसे लड़ी थी वो मर्दानी
कहते हैं जिसको हम झांसी वाली रानी..!!
उसके अंदर भी भारत को पाने का सपना था
उसके लिए भारत ही उसका अपना था
ऐसे ही भारत की कल्पना करती हूँ मैं…!!!
देश पे नाज़ करने का सपना रखती हूँ मैं.
जहां रामराज़ फिर आएगा
तिरंगे को देख कर… सम्मान में सिर झुक जाएगा
जहां बेटा बेटी में फर्क न किया जाएगा
शादी के दो दिन बाद ही बहु को न जलाया जाएगा
आरक्षण को छोड़ हुनर परख कर अफसर लगाया जाएगा..!!!!
उस दिन मेरा देश आज़ाद कहलाएगा…..!!
इस कल्पना को पूरा करने का सपना रखती हु मैं…
अपने भारत पर गर्व करने का सपना रखती हूँ मैं..
:-कविता शर्मा

9 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 05/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2016
  4. Pixy 14/09/2016

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