मेरा देश

देश मेरा आज़ाद हुआ
पर धीरे धीरे बर्बाद हुआ
कभी लूटा गोरो ने तो कभी नेताओं का शिकार हुआ
देख कर ये दारुण चेहरे
दिल में मेरे पड़ गए जखम गहरे
आज फिर किसी पर अत्याचार हुआ
बलात्कार, घूसखोरी से ये देश लाचार हुआ
सो गयी बुद्धि जल गए गाँव गली
ना जाने ये कैसी हवा चली
आखिर कब ये बदलाव हुआ..??
देश मेरा लाचार हुआ …
संसद की अब न कोई परिभाषा है
ये बस लंगूरों को तमाशा है..
मेरे मन में तो छोटी सी आशा है
देश मेरा संपन्न हो बस एक यही अभिलाषा है..!!
मैं भी कह सकूँ की
हाँ देश मेरा आज़ाद हुआ
हर सपना साकार हुआ
देश में मेरे आज सही बदलाव हुआ….
:– कविता शर्मा