कहीं ना कहीं……

आपसे है रिश्ता कोई……
जैसे खुदा का फरमान कोई..

चाहत मेरी आपके लिए बदनाम कहीं..
लेकिन दिल मे है तेरे अरमान कहीं..

जिंदगी का सफ़र एक तरफ़ा मेरा…
चाहत मे मेरी दुनिया गुमनाम कहीं…

प्यार मे आपके मेरे दिल की पहली…
समज ना सके आप कहीं ना कहीं….

जिंदगी का ये खेल बड़ा….
समज ना सके हम भी कहीं ना कहीं….

छा गये बादल ,हो गई बारिश….
बह गया मेरा प्यार..
कहीं ना कहीं…

– मयूर सिंधा
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3 Comments

  1. Barun Mohanty 05/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 05/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/07/2016

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