तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ

तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।
तू भी रहमतवाला होगा
मेरा मन भी तर जावेगा।

सिसक रहे हैं मंदिर तेरे
मेरी आँसू माला पहने
डूब रहा मैं अश्रूधार में
पहने अपने दुख के गहने

मेरी नैय्या पार लगाकर
तेरा कर्म निखर जावेगा
तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।

स्वर्ग नरक की बातें भूलूँ
जब जब तेरे मंदिर जाऊँ
तेरी मूरत देख नयन से
मन ही मन हर्षित हो जाऊँ

इस दर्शन के मात्र क्षणों से
जीवन सुख से भर जावेगा
तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।

तुझे अलंकृत कर न सकूँ तो
कैसे मैं भी तर पाऊँगा
सजी सजायी थाली मेरी
कंपित कर की कहाँ धरूँगा

तेरा ध्यान धरूँ गर उर में
तेरा मन भी तर जावेगा
तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।

तेरे चरणों की पूजा से
मेरे पथ भी सज जावेंगे
तेरे कदमों की आहट से
पथ के कंटक हट जावेंगे

मैं पथ पर यूँ चलूँ निडर तो
तेरा सफर सँवर जावेगा
तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।

तुझे पूज्य प्रतिपादित करने
खुद को मैं पापी कहता हूँ
और पूण्य परिभाषित करने
तू बस पापों को गिनता है

मेरे ही सब धर्म कर्म से
तेरा धर्म सुधर जावेगा।
तेरा दर्शन गर मैं पाऊँ
तेरा रूप निखर जावेगा।

—- भूपेन्द्र कुमार दवे

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2 Comments

  1. mani mani 05/07/2016
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 01/08/2017

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