प्रकाश की शायरी

(१) इस जहाँ में आया हूँ,कुछ करके जाऊंगा
जीवन के सारे बाधाओं से लड़ के जाऊंगा |
जो लोग मेरी नाकामयाबियों पे हँसते हैं
किसी दिन सफल हो उनके गाल पे तमांचा जड़ के जाऊंगा |

(२) मैं कुछ भी लिख दूँ कलाम हो जाएगी
चलते रहो राही वर्ना शाम हो जाएगी
बड़ा गुरूर है न तुम्हे अपनी इज्जत का
प्यार करके देखलो नीलाम हो जाएगी |

(३) आज निकला अँधेरी रातों में सब सुनसान नज़र आया
छोड़ गया था बहुत पहले वो मकान नज़र आया
चहकते रहती थी खुशियां जिसके आँगन में
माँ के चले जाने के बाद वो वीरान नज़र आया

14 Comments

  1. Abhishek Sagar 05/07/2016
  2. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
  3. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016
  5. mani mani 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016
  8. babucm C.m.sharma(babbu) 05/07/2016
    • Prakash Tripathi 06/07/2016

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