रेल की सवारी !!

रेल की सवारी रेलमपेल,
मची रहती है ठेलम-ठेल |
आगें ठेल पीछे धकेल,
कस दो चारो तरफ से नकेल |
ये है अपनी खुद की रेल,
बना दो चाहे इसको जेल |
सबको पडी रहती जल्दी ,
नही हो किसी को देर |
घर में जो है भींगी बिल्ली ,
यहाँ बन जाते हैं शेर |
जल्दी चढो भाई मत करो देर ,
नही तो लग जायेगी लोगों की ढेर |
ऐसा कह-कह कर काम बनाते ,
धीरे से सब डिब्बे में चढ जाते|
अन्दर झूमा – झटकी होती ,
आँखों से बह जाते मोती |
कुछ पल में शान्त हेा जाते,
बहस करने वाले भी दोस्त बन जाते |
रेल के नाम बड़े गजब के ,
झेलम , यमुना, ताप्ती गंगा,
मन सुनकर ही हो जाता चंगा |
लोकल, सुपर फास्ट और मेल,
सफर के बीच में लागे ये जेल |
दादा – दादी , नाना- नानी ,
बच्चो को रेल में खूब रिझाते ,
कभी शेर , कभी खरगोश और
कभी हाँथी के सपने दिखाते,
खाली बैठे -बैठे ही बच्चों को उल्लू बनाते |
जंगल में खडा कुत्ता भी देख,
बच्चे शेर-शेर चिल्लाते |
छुक – छुक – छुक कर चलने वाली ,
रूक – रूक कर भी चलती है |
मौसम की तरह आज कल रेल भी
अपनी चाल बदलती है|
सौ बातों की है एक बात
रेल अगर पहुँचे सही समय पर,
बोझ ना होता बिल्कुल सिर पर |
प्लेटफार्म की घडी़ जब सही समय बताती ,
याञा मंगलमय हो जाती ||

3 Comments

  1. babucm babucm 05/07/2016
  2. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 05/07/2016
  3. mani mani 05/07/2016

Leave a Reply