जुर्रत – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

जुर्रत

बड़े गुमान से भेजा था हमने पैगाम अपनी मोहब्बत का
और बड़ी ही शिद्दत से आया उनका भी जवाब ………………………………
के इक बार अगर खुद को आईने में देख लिया होता हज़ूर
तो फिर पैगाम-ए-मोहब्बत की जुर्रत आप करते ना जनाब ……………………….

शायर : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
  4. mani mani 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
  5. आदित्‍य 05/07/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 05/07/2016
  6. babucm C.m.sharma(babbu) 06/07/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 06/07/2016

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