मुझे उसकी वफ़ा चाहिए किसी आम की नहीं………..!!

ये ज़माने की वफ़ाएं मेरे काम की नहीं;

मुझे उसकी वफ़ा चाहिए किसी आम की नहीं;

उसकी तो एक मुस्कराहट भी अनमोल थी;

ये तमाम मुस्कुराहट किसी दाम की नहीं;

मुझे ग़म है तो उसके चले जाने का;

परवाह मुझ पर लगे किसी इलज़ाम की नहीं;

मेरा हाथ देख कर रब ये बोला;
बहुत सी चाहते तेरे लिए हैं बाकि ;

लेकिन, तेरे हाथ में कोई भी लकीर उसके नाम की नहीं………..!!

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 04/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 04/07/2016
  3. mani mani 04/07/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/07/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 04/07/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 04/07/2016
  7. Saviakna Savita Verma 05/07/2016

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