बक्से का जादू

जैसे हर जादूगर का अपना
खास जादू होता है
वैसा उसमे भी मोजूद था |

अलमारी में छिपे बक्से का जादू
जब भी बक्सा खुलता
उस पारी का जादू
हर बार मुझे मोहित कर जाता
मिठाई,बिस्कुट, दाल –मोट और बतासे की खुश्बू
उस बक्से के तिलिस्म को और बढ़ा देता
में दादी के पीछे-पीछे
मडराता फिरता
वो अपने-आप को चोदह पोते-पोतियों में
बराबर बंटती फिरती
कभी डराती,कभी चुपके से किसी को
बक्सा खोलकर मिठाई देती|

उस बक्से की जादूगरनी थी वो
आज चाची ने बक्सा खोला
आशचर्य की बात है
जादू नहीं हुआ
मेरी दादी का जादू खत्म था
कोई पारी नहीं दिखी

दादी के जाने के बाद
उस बक्से का तिलिस्म हवा हो गया
बक्सा टीना सा मालूम होता है|

रिंकी

22 Comments

  1. davendra87 davendra87 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  3. vinay kumar vinay kumar 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  5. सोनित 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  6. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  8. Prakash Tripathi 04/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016
    • Rinki Raut Rinki Raut 04/07/2016

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