बारिश की कुछ बूंदे…….मनिंदर सिंह “मनी”

बारिश की कुछ बुँदे

बारिश की कुछ बुँदे,
और ठंडी हवा का झोका आया,
भागवान तुम हो कहाँ,
गरमा-गर्म पकोड़े,
और चाय पिलाए हमे बना,
झट से मेरे दिल में ख्याल आया,
उतार लाते है हम,
छत से कुछ लत्ते,
तब तक आप आलू छीले,
दो चार मिर्च,
प्याज़ काटकर,
कुछ पालक के पत्ते बीने,
कढ़ाई भी रख देना,
तेल डाल आंच पर,
बेसन में नमक,
मिर्च के साथ,
सब को मिला,
धीरे-धीरे तल लेना,
हलकी-हलकी साँच पर,
झट से श्रीमती जी ने,
सारी विधि बताई,
हम सोच रहे थे,
क्यों अपने दिल की बात बताई,
पकोड़े और चाय पीने की,
इच्छा क्यों जताई ?
जैसे तैसे तले पकोड़े,
झट से चाय बना,
हम भी पहुंचे छत पर,
चारपाई पे लेटे-लेटे,
श्रीमती जी मुस्काई,
फिर बोली,
आज मुझे भी,
एक दिन की छुट्टी दे दो,
थक जाती हूँ,
सुबह से ले रात तक,
बिना पगार के,
कभी माँ-कभी बीवी,
बन छोटे बड़े कामो को निपटाती,
एक दिन बना के खिला दे,
कोई थोड़ा आराम दिलवा दे,
सातो दिन एक से,
मेरे हिस्से छुट्टी क्यों नहीं आती ?,
दिल मेरा पश्चाताप से भर गया,
हल्की हल्की सी मुस्कुराहट,
दोनों के चेहरों पर,
गरमा-गर्म पकोड़े और चाय,
छुट्टी का लुफ्त,
श्रीमती संग उठाया,
बारिश की कुछ बुँदे,
और ठंडी हवा का झोका आया,

मनिंदर सिंह “मनी”

10 Comments

    • mani mani 03/07/2016
  1. babucm C.m.sharma(babbu) 02/07/2016
    • mani mani 03/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/07/2016
    • mani mani 03/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
    • mani mani 03/07/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 03/07/2016
    • mani mani 03/07/2016

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