चले आना…

एक पुरानी रचना फिर से पोस्ट का रहा हूँ .. आशा करता हूँ आपको पंसन्द आयेगी !!

II चले आना II

कभी होना न उदास तुम, सदा यो ही मुस्कुराना I
जब लगे तन्हाई का आलम पास मेरे चले आना II

बदला जाए जो रुख जमाने का, न तुम घबराना I
उठा के दो कदम सरे राह मेरे पते पर चले आना II

आती है मुश्किलें मंजिल-ऐ-जिंदगी की राहो मैं I
फांदकर हर बाधा जिंदगी का गुलशन सजाना II

न मिले सके खवाबो को मंजिल तो कोई बात नही I
रखना हौसले बुलंद, मंजिलो पर बढ़ते चले जाना II

मरने की बाद तो उठा लेता है कंधो पर ये ज़माना I
जीते जी मिले एक कन्धा काफी है तेरा चले आना II

अपनी होकर भी बेगानी सी लगने लगे जब दुनिया I
और ढूंढे दिल किसी अपने को, पास मेरे चले आना II

………………..डी. के. निवातियाँ

18 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 02/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
  4. C.M. Sharma babucm 02/07/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
    • C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 02/07/2016
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
  7. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
  8. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016

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