जब ख्वाबो में मुलाकात-ए-यार हुआ करता है…..

जब ख्वाबो में मुलाकात-ए-यार हुआ करता है,
हर तरफ मौसम-ए-बहार हुआ करता है ,
बिछा देते है उनकी रास्तो में हथेली अपना,
जब कभी उनका रास्ता कांटेदार हुआ करता है….

बस एक ही ख्वाहिस है दिल में कभी हकीकत में दीदार-ए-सनम हो,
किस्मत में हो सितारे और कदमो में चमन हो ,
क्यों मेरी तरह हर शख्स बेकरार हुआ करता है ,
जब ख्वाबो में मुलाकात-ए-यार हुआ करता है…

शबनम के बूंदों की तरह सूरत जिसकी भोली हो ,
कोयल सी मीठी जिसकी प्यारी सी बोली हो ,
क्यों चिलमन क पीछे से ही उनका दीदार हुआ करता है ,
जब ख्वाबो में मुलाकात-ए-यार हुआ करता है….

चाँद क जैसा हो जिसका मुखड़ा,
देखते ही भूल जाये जिसे इंसान अपना दुखड़ा,
क्यों “अमर” दरबदर ऐसा इंतजार हुआ करता है,
जब ख्वाबो में मुलाकात-ए-यार हुआ करता है……..

“अमर चन्द्रात्रै पान्डेय”

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/07/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 02/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 02/07/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 03/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
  4. fdhshffvhghgv 02/07/2016