जिगरा…

किसने जाना है मोहब्बत के सफर का अंजाम ….
हर कदम शोलों पे चलने का भी जिगरा चाहे….

यह नज़रें इनायत यह मीना ए मोहब्बत….
उल्फत के दरिया में ज़हर पीने का जिगरा चाहे….

रुसवाई का ताज पेशानी पे रहे दाग…
ज़ख़्म दिल के पिरोने का भी जिगरा चाहे….

अपनी मर्ज़ी से जिए हैं तो रोएंगे भी खुद से ही ….
पत्थर को रुलाने को पत्थर सा ही जिगरा चाहे…..

यह तो “चन्दर” ही था जो जा लपका सूरज को…
सरे महफ़िल में जल जाने का भी जिगरा चाहे….
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/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

16 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/06/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/06/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 30/06/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
  4. mani mani 01/07/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/07/2016
    • babucm babucm 01/07/2016
  6. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 01/07/2016
    • babucm babucm 01/07/2016

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