मुसाफिर

मुसाफिर हैं इस तेरे राहों के हम
हमें अपने मंजिल दिखला तो दो ।
बहुत चोट खाये हैं चलते हुए
दर्द भरे जख्मों को सहते हुए
पक्के हंै अपने ही इरादों के हम
हमें अपने मंजिल ।
ये बढ़ते कदम अब न रूक पायेगा
बाधा.विघ्न देख अब न झुक पायेगा
अंजान हैं ऐसे ही चाहों से हम
हमें अपने मंजिल ।
मेरे सपने न छूटे बस यही चाहिए
मेरे संकल्प न रूठे यही चाहिए
विश्वास में बंधे अपने वादो से हम
हमें अपने मंजिल ।
न रोक पायेगा अब ये जमाना मुझे
अच्छा लगता नहीं कोई दे ताना मुझे
बन गये कायल अपने यादों के हम
हमें अपने मंजिल ।
अपने कर्मो से ही पाते हैं मंजिल सही
जम जाते हैं ऐसे ही महफिल सभी
मुसाफिर हैं तेरे फिजाओं के हम
हमें अपने मंजिल ।

बी पी शर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

8 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 30/06/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 30/06/2016
  2. Amar Chandratrai Amar chandratrai Pandey 30/06/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 30/06/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 30/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/06/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 30/06/2016

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