साया

मायूस ओ भी थे तो खुश हम भी न थे, रोये ओ भी तो चुप हम भी न थे,
बंदिशों के बादल छाये रहे साया बनकर, पास ओ अब भी थे तो दूर हम भी न थे …….!!

3 Comments

  1. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 29/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/06/2016

Leave a Reply