कपडे……..मनिंदर सिंह “मनी”

सुन्न सा पड़ गया, जैसे मैंने अलमारी खोली,
कपडे सजीव से दिखने लगे, बातें मुझसे करने लगे,
हम पड़े है कब से इस अलमारी की जेल में बंद,
पुराने हो गए, नहीं रहे तुम्हारे काम के सुख दुःख करने लगे,
नए नए कपडे लाते हो, पुराने भरते जाते जो,
क्या करोगे इतने कपड़ो का, सवाल मुझसे करने लगे,
कुछ को कई साल हो गए जिनको तुमने देखा तक नहीं,
घुट रहा है दम हमारा, आँखों में उनकी अश्रु भरने लगे,
कितनो के तन पर कपडा नहीं, कितने ठण्ड से मरे
कितने जी रहे फटे कपड़ो में, सोच आँखों के आगे अँधेरे घिरने लगे,
किसी के काम आ जाये, किसी के चहरे की मुस्कान बन जाये,
इससे बेहतर क्या होगा ? लगा जैसे जिरहा करने लगे,
तुमको भगवान ने दिया इतना कुछ ? शुक्र करो उसका,
कर दो किसी की जरूरत मंद की मदद, मासूम से बन कहने लगे,
अपने लिए तो हर कोई जीता, जियो किसी और के लिए,
जीवन की वास्विकता से परिचय कपडे “मनी” को करवाने लगे

नोट:- आप सभी से बेनती है जो भी आपके पास बेकार कपडे है या बिस्तर है जो आप की जरूरत में नहीं आते है उन्हें गरीब मन्दो को जरूर दे | आपके कपडे किसी की जिंदगी बचा सकते है किसी की इज़्ज़त ढक सकते है | आप सभी से मेरी दिल से बेनती है |

18 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 29/06/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  6. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 29/06/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/06/2016
    • mani mani 30/06/2016
  8. babucm babucm 30/06/2016
    • mani mani 30/06/2016
  9. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 30/06/2016
    • mani mani 30/06/2016

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