जी चाहता है


घनधोर घटा नभ में घुमड़े ,
उज्ज्वलता से प्रदीपन,
गर्जना करें दामिनी
सावन की प्रथम बूँद का
दरख्तों से टकराकर
गिरे प्रबल वेग से
आलिंगन की प्यासी
धरा से
चुम्बन स्वरुप स्पर्श करे ..!
गर्भ से उपजी सौंधी सौंधी
मिटटी की भीनी भीनी
ह्रदय को सपंदन कर देने वाली
सुगंध का अनुभव करने को
जी चाह्ता है……!!
!
हाँ मेरा फिर से
उस गाँव की मिटटी से
लिपटकर बारिश में भीगने को
जी चाहता है ………..!!

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डी. के. निवातियाँ _______@

18 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  2. mani mani 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  3. babucm C.m.sharma(babbu) 02/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  4. Ankita Anshu Ankita Anshu 03/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/07/2016
  6. Rinki Raut Rinki Raut 03/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/07/2016

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