जिंदगी में मेरी तुम कही भी न थे। कवि प्रमोद दुबे

जिंदगी में मेरी तुम कही भी न थे
मौत के पार लेकिन तुम्ही दिखते।
कर गया पार में उस जहां को भी अब
जिस जहां में मुझे तुम नही दिखते।

सत्य ये भी है के प्यार था भी नही
झूठ ये भी है के प्यार है भी नही
पृथ्वी पर कभी हम मिले न मिले
स्वर्ग के पास लेकिन तुम्ही दिखते।

मेरे दुख में मेरा साथ देने लगी
आज दुनिया मुझे प्यार देने लगी
साथ रिश्तों का रहना जरुरी बहुत
काश ये भी हुनर वक़्त पर सीखते।

कवि
प्रमोद दुबे

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/06/2016

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