“तोहे मोरी कसम”_अरुण कुमार तिवारी

‘तोहे मोरी कसम’
_अरुण कुमार तिवारी

ऐसे रूठो न मोरे पिया,
तोहे मोरी कसम…
हाँ..तोहे मोरी कसम…

रूठे पिया रूठे सब तारे,
बदरा भये सब रंग ते कारे|
उमड़ घुमड़ घिर नैना छाये,
कजरा धुल मिल बह-बह जाए|
ऐसे तोड़ो न मोरा जिया,
देखो बरसे नयन|

ऐसे रूठो न मोरे पिया,
तोहे मोरी कसम|
हाँ..तोहे मोरी कसम..

नील गगन की बूँदें जो निखरें,
खुशियों की मोती बन बिखरें|
सूरज से चन्दा जब रूठे,
अरमानों की रैना लूटे|
छन-छन दहे ये हिया,
लागी ऐसी अगन|

ऐसे रूठो न मोरे पिया,
तोहे मोरी कसम|
हाँ..तोहे मोरी कसम..

तक तक जगतीं सोचें रतियाँ,
काहे कही तोसे नीम सी बतियाँ|
रीते रीते जले मन कादल,
टूटे सपन भीगा अब आँचल|
अब सोचे बे-सोच किया,
रोये गीला ये मन|

ऐसे रूठो न मोरे पिया,
तोहे मोरी कसम|
हाँ..तोहे मोरी कसम..

तोहे….मोरी….कसम…..

-‘अरुण’
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20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/06/2016
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  4. आनन्द कुमार ANAND KUMAR 29/06/2016
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  5. mani mani 29/06/2016
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  7. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 29/06/2016
  8. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 29/06/2016
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  9. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/06/2016
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  10. sarvajit singh sarvajit singh 29/06/2016
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  11. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/06/2016
  12. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 30/06/2016

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