क्या कोई रोक पाया है

क्या कोई रोक पाया है कभी

हवा का बहना

बीज का अंकुरित होना

फूलों का खिलना

फिर कैसे रोक पाएगा

कभी कोई

संसार की श्रेष्टतम भावना

प्रेम का फलनाफूलना

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  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 29/10/2014

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