इबादत……मनिंदर सिंह “मनी”

चाहत मेरी जब इबादत बन गयी,
पूछा मुझसे किसी ने खुदा का पता,
नज़र मेरी यार के चहेरे पर थम गयी,
दिखता नहीं उसके सिवा कोई और,
जर्रे जर्रे में उसकी तस्वीर बन गयी,
सूरत को निहारने वाली नज़र,
नज़र को भाने वाली सूरत मिल गयी,
दिल को किसी और के लिए,
धड़कने की वजह मिल गयी,
तन्हा बैठे बैठे यु ही “मनी” को
मुस्कुराने वाली बात मिल गयी,

12 Comments

  1. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  2. sarvajit singh sarvajit singh 28/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016
  6. babucm babucm 29/06/2016
    • mani mani 29/06/2016

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