“आंधी में चिराग”…..अमर चंद्रात्रे पान्डेय…..

दिल को रह रह के नया अंदेशा डराने लग जाए ,
वापसी में उसके मुमकिन है ज़माने लग जाए,
सो नहीं पाए तो सोने की दुआएं ,
नींद आने लगे तो खुद को जगाने लग जाए ,
उस को ढूंढे उसे एक बात बताने के लिए ,
जब वह मिल जाए तो बात छुपाने लग जाए ,
हर दिसंबर इसी चाहने गुजारा की कहीं ,
फिर से आंखों में तेरे ख्वाब आने लग जाए ,
इतनी फुर्सत से मिल कि हमें सुकून आ जाए,
और फिर हम भी नज़र तुझसे चुराने लग जाए,
जीत जाएंगी हवाएं यह खबर होते हुए ,
अमर तेज आंधी में चिरागों को जलाने लग जाए.

5 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
  2. mani mani 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016

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