“इज़हार ए हाल”……अमर चंद्रात्रे पान्डेय…….

न जाने कैसे उनसे इज़हार ए हाल कर बैठे,
बातों ही बातों में यह कमाल कर बैठे,
जिन्हें शौक था नजरों से कत्लेआम करने का,
उन्हीं से हम अपनी जिंदगी का सवाल कर बैठे,
सुने थे हमने भी बहुत आशिकी के किस्से,
न जाने कैसे आशिकी आ गई हमारे भी हिस्से,
जाने अनजाने में यह कैसा बवाल कर बैठे,
बातों ही बातों में यह कमाल कर बैठे,
उफ ये अदाएं उनकी उफ उनका वह अंदाज शायराना,
उफ उनकी आंखों की मस्ती उफ उनका वो नजराना,
आंखों ही आंखों में यह काम बेमिसाल कर बैठे ,
बातों ही बातों में यह कमाल कर बैठे,
रुखसार की चाहत थी दिल में मधुर मिलन की दिल में थी आस,
निकलकर आएगा वह हुस्न चिलमन से दिल में जगी थी दीदार की प्यास,
दिल में उनकी इबादत की चाहत अमर हर हाल कर बैठे,
और बातों ही बातों में यह कमाल कर बैठे !

12 Comments

  1. sarvajit singh sarvajit singh 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
      • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
  3. babucm babucm 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
  4. mani mani 28/06/2016
    • Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/06/2016

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