NSG-जब छूता ऊँचाई कोई तभी पडोसी जलते हैं

Nsg पर जश्न मनाते देश के गद्दारो पर कटाक्ष करती तथा सभी देशभक्तों से चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील करती मेरी ताजा रचना —

रचनाकार -कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
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NSG – जब छूता ऊँचाई कोई तभी पडोसी जलते हैं

उडी सियासी गंध सडेली फ़िर भारत की गलियों में
चीन चीखता विष निकला है राजनीति की कलियों में

कजरी के प्यादे भी खुश हैं कॉंग्रेसी भी मटक गये
नहीँ देशहित बचा किसी में बस कुर्सी पर अटक गये

वामी और नपुंसक सारे चीन के तलवे चाट रहे
कूटनीति पर आज चवन्नी चोर ज्ञान को बाँट रहे

हारा पूरा देश, नहीँ बस एक शख्स ही हारा है
घर के जयचंदों के मुख पर एक विजय का नारा है

पर मत भूलो भारत को फ़िर विश्व पटल पर जान मिली
जो कल तक बुझाता दीपक था सूरज की पहचान मिली

दो सालों में ही जाना है देश-तरक्की क्या होती है
हुक्का पानी बंद हुआ क्यों उर ख़बरंडी क्यों रोती है

कामचोर है कौन यहाँ पर, टाँगें कौन अडाता है
कौन यहाँ भारत की बर्बादी का पाठ पढाता है

एक-एक कर सबके दिल की गंध सामने आयी है
हारे हो तुम ही भारत से, उसने हार ना पायी है

देश तरक्की राह चला तो आँख सभी दल मलते हैं
जब छूता ऊँचाई कोई तभी पडोसी जलते हैं

चीन की आज बिलबिलाहट भी इसकी एक निशानी है
भारत की ताकत क्या है पूरी दुनिया ने जानी है

भारत भोग रहा है फल अबतक रंगीले नेहरू का
जो था एक दलाल लॉर्ड माउंटबेटन की जोरू का

जिसने देश नहीँ देखा नज़रों में जिसके काम रहा
उसकी करनी की भरनी में एक शख्स नाकाम रहा

पर इक दिन ये चीन भी आकर दाल पियेगा जूतों की
आँख खुलेगी जब भारत के सच्चे वीर सपूतों की

रंगरलियों में भूला भटका स्वाभिमान जब जागेगा
चीन यहाँ से बोरी बंदर लेकर घर को भागेगा

कर लेंगे जब आँख तरेरी सब चीनी उत्पादों से
कर लेंगे सब सन्धी भारत स्वाभिमान के वादों से

“आग” कहे ये चीन यहाँ आकर अँगूठा चाटेगा
सबसे पहले भरी भीड़ में भारत को छाटेगा

———-कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”

(कॉपीराइट)