कर्म और गुण

एक कर्म सुनाम कमाये,
एक कर्म बेनाम रह जाये|
एक कर्म बदनाम बनाये||

एक आग जग को दिखाये,
एक आग जग को खिलाये|
एक आग जग को जलाकर राख बनाये||

एक पानी प्यास बुझाये,
एक पानी अन्न उगाये|
एक पानी दुनिया को डुबाये||

एक हवा श्वास दिलाये,
एक हवा जग को उड़ाये |
एक हवा जीवन मिटाये ||

एक नारी जन्म दे जगजननी कहलाये,
एक नारी संग दे संगिनी कहलाये|
एक नारी कामलिप्त हो कुलटा कहलाये||

एक फूल सुगंध फैलाये,
एक फूल सुन्दरता दिखाये|
एक फूल दुर्गन्ध फैलाये||

एक पेड़ जो फल उगाये,
एक पेड़ जो जग साजाए|
एक पेड़ जो डंडा बन मार खिलाये||

एक अन्न जो भूख मिटाये,
एक अन्न जो रोग बढ़ाये|
एक अन्न जीवन घटाये||

एक प्राणी दूजे के काम आये ,
एक प्राणी दूजे को खाये|
एक जवान दूजे के खातिर अपनी जान गवांये ||

एक समय नवजीवन दे ,सफल बनाये खुशियाँ लाये,
एक समय दुःख मे कष्ट दिलाये बड़ा रुलाये|
एक समय सबको बिन बुलाये दुनिया से मिटाए||

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/06/2016
  2. Hiranmoy debnath 27/06/2016
  3. Chinmoy sarkar 27/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 27/06/2016
  5. "संजू" रोशन शर्मा "संजू" रोशन शर्मा 27/06/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/06/2016
  7. Amar Chandratrai Amar Chandratrai 28/06/2016

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