शायरी : ‘हाल-ए-दिल’

कैसे बताऊँ मैं उन्हें, अपने’दर्द-ए-दिल’का
गुजरता नहीं वक्त उनको देखे
बिना,
गैरों से मिलके तुमने सताया बहुत है,
करुँ क्या ?’गुस्ताख-दिल-ए’
मानता नहीं है ।।
-आनन्द कुमार

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 26/06/2016
    • आनन्द कुमार ANAND KUMAR 26/06/2016
    • आनन्द कुमार ANAND KUMAR 26/06/2016

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