कितने दिन हुए देखे

फूल पर बैठा हुआ भँवरा
शाख पर गाती हुई चिड़िया
घास पर बैठी हुई तितली
और तितली देखती गुड़िया

हमें कितने दिन हुए देखे !

घाट के नीचे झुके दो पेड़
धार पर ठहरी हुई दो आँख
सतह से उठता हुआ बादल
और रह-रह फड़कती दो पाँख

हमें कितने दिन हुए देखे !

बाँह-सी फैली हुई राहें
गोद-सा वह धूल का संसार
धूल पर उभरे हुए दो पाँव
और उन पर बिछा हरसिंगार

हमें कितने दिन हुए देखे !

घुप अँधेरे में दिए की लौ
दिए जल पर भी जलाते लोग
रोशनी के साथ बहती नदी
और उससे नाव का संयोग

हमें कितने दिन हुए देखे !

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