उस दिन मेने सोच लिया था। कवि प्रमोद दुबे

उस दिन मेने सोच लिया था
छोड़ के उसको मैं जाऊंगा।
चाहे रोए चाहे तड़पे
लोट के लेकिन न आऊंगा।
लिकिन जाने क्या हो जाता
नयन झील में देख के मुझको।
एक नज़र में ही कर देती
दुनिया से बेगाना मुझको।
अब जाने क्यों सोच रहा हु
कमरे में मैं बैठ अकेले।
हो कर उससे ज़ुदा मगर क्या
एक पल भी ज़ी पाउँगा।
उसको पाने के रस्ते में
खून के रिश्ते भी छूटेंगे।
क्या मैं टूटे रिस्तो का
दर्द अकेले सह पाउँगा।
जान लिया प्यार को मेने
ये रास्ता होता बोहोत कठिन है
लेकिन मैं भी उसकी खतिर
दुनिया से भी लड़ जाउँगा।

कवि
प्रमोद दुबे

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016

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