“वो न मैं अब रहा”_अरुण कुमार तिवारी

कतरा कतरा गला, वक्त की मार से
बह चला लुट चला, वो न मैं अब रहा|

ज़िन्दगी के मुहाने,अजब गोल थे
घूमता ही चला, वो न मैं अब रहा|

जिसको चाहा न चाहा, उसी एक को,
ढूंढता ही रहा,वो न मैं अब रहा|

बनते किस्से कहानी,के किरदार सब,
उनकी ग़ज़लो में था,वो न मैं अब रहा|

लुट चले बागबाँ,घुमते दर ब दर,
हँसता फिर भी मरा,वो न मैं अब रहा|

खींचते क्यारियाँ,वक्त के हाथ पर,
किश्मते काफ़िरी,वो न मैं अब रहा|

वक्त ठहरा रहा, ज़िन्दगी बह चली,
डूबता मैं गया ,वो न मैं अब रहा।

कतरा कतरा गला, वक्त की मार से….

-‘अरुण’
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19 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  4. babucm babucm 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  5. mani mani 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 26/06/2016
  8. Gayatri Dwivedi 26/06/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 26/06/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/06/2016

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