विधाता

विधाता सबका तकदीर बनाता
किसी को कुछ समझ आता ।
जलचर नभचर तलचर तुमने सबमें जान है डाला
सबके तुम भाग्य विधाता सब पे नजर है डाला ।
जीवन खेल कैसा है ये नाता
विधाता सब का तकदीर बनाता ।
तुमने सूरज चाॅद बनाया धूप कहीं कहीं छाया
तेरी महिमा कौन न जाने सब में तेरी माया ।
प्रभु जी क्या क्या खेल दिखाता
विधाता सब का तकदीर बनाता ।
सतयुग द्वापर श्रेता देखा क्यों समझ नहीं आया
भूले भटके क्यों हैं हमसब खोकर क्या अब पाया ।
सबको क्या क्या खेल दिखता
विधाता सब का तकदीर बनाता ।
दानव से मानव तक उसने सबको गले लगाया
प्रेम पाठ सिखलाया उसने सबसे हाथ मिलाया ।
गलती करके तुम न पछताना
विधाता सब का तकदीर बनाता ।
बी पी षर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

6 Comments

  1. babucm babucm 25/06/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 26/06/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 26/06/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 26/06/2016

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