लगता है तुम आ रही

मेरी अटरिया कागा बोले,
लगता है तुम आ रही,
मोरा जियरा डोले हौले,
लगता है तुम आ रही,
भीनी-भीनी हवा में खुशबू,
लगता है तुम आ रही,
बाग़ में भँवरे गुंजन करते,
लगता है तुम आ रही,
कलियाँ अब पंखुड़ियां खोलें,
लगता है तुम आ रही,
छम-छम,छम-छम पायल बोले,
लगता है तुम आ रही,
रिम-झिम,रिम-झिम बदरा बरसे,
लगता है तुम आ रही,
मनवा हर आहट को तोले,
लगता है तुम आ रही,
वक़्त की सूई काहे न डोले,
बोले ना तुम आ रही ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

10 Comments

  1. babucm babucm 25/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/06/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016
  4. mani mani 25/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016

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