प्रेम

(एक पुरानी रचना साझा कर रहा हु ……………आपकी मूल्यवान प्रतिक्रिया अपेक्षित है !! )

प्रेम

आओे करे प्रेम इस जग में चाँद और सूरज जैसा
तू ढूंढे बन चाँद पूनम तो कभी अमावस्या जैसा
मैं बन सूरज तड्पु याद में, दहकता अंगारे जैसा
तरसे दीदार मैं दूजे के खेले-खेल आँखमिचोली जैसा

+++++ डी. के. निवातियाँ +++++

26 Comments

    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  1. mani mani 24/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  2. Shyam Shyam tiwari 24/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  4. MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  7. आदित्‍य 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  8. आदित्‍य 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  9. babucm babucm 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  10. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  11. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 25/06/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/06/2016

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