Tanha Musafir

एक तनहा मुसाफिर था मैं ज़िन्दगी के सफर में ;
एक मंज़िल की तलाश थी जीवन के डगर में ;
एक ख़ुशी की आस थी किसी अपने का रमना था ;
कहता था सबको अपना मगर हर कोई बेगाना था ;

कुछ दर्द था जुदाई का कुछ सितम यादों का था ;
झूटी थी कस्मे रिश्तों की कुछ टूट -ता अरमान झूठे वादों का था ;
भटकता था मैं काफिलों की तरह हो कोई अपना ऐसा ये सपना था ;

टूटी हर ख्वाइश मेरी टूटा हर अरमान मेरा ;
ना जीने की कुछ आस थी ना कोई हस्ती थी ना कोई नाम मेरा ;
हर कोई मुझको सताता था हर कोई मुझको रुलाता था ;
तन्हाई इतनी हुई गहरी के सन्नाटा भी मुझको बुलाता था ;

जब छोड़ जाता था कोई अपना कहते थे याद करेंगे ;
ना भूलेंगे तुमको कभी फिर मुलाकात करेंगे ;
मुलाकात तो ना हुई ना कोई खबर उनकी मिली ;
मेरी ज़िन्दगी तो बस जैसे है यादों में जली ;

हर मस्जिद मंदिर गुरूद्वारे में मैं फ़रियाद करता था ;
बस खुदा की रेहमत से खुद को आबाद करता था ;

ना कोई रौशनी थी ना कोई रंग था ;
अकेला था मैं बस मेरा सय संग था ;
जैसे अँधेरे में किसीने डीप जलाया हो ;
मेरे दिल को मेरे ज़ख्मो को इबादत से सहलाया हो ;

वो साथी मिला मुझको मेरी मंज़िल मुझको मिली ;
बरसो गम की बारिश के बाद मुझको ख़ुशी मिली ;

वो रखता था मुझे पल पल साथ अपने ;
मैं देखता था ख्वाब वो सजता था सपने ;
बस तक़दीर कुछ ऐसी रही जैसे रूठा हो खुदा ;
आखिर कार वो साथी भी हो गया जुदा ;

मुझे फिरसे दर्द ने रुलाया ;
मेरे मनन मेरे अरमानो को जलाया ;
कुछ महीने बीते कुछ बरसों बीते ;
उसके इंतज़ार में ज़माने बीते ;

फिर याद आई ज़िन्दगी की हकीकत ;
की रोशान होगा मुकद्दर ना होगी कोई उल्फत ;
बस उम्मीद ना छोडूंगा उसके आने की ;
कोशिश पूरी करूँगा उसको पाने की ;

एक नया होगा दौर शुरू कुछ बनके मैं दिखलाऊँगा ;
अपनी म्हणत अपनी लगन से उस मंज़िल को मैं पाउँगा ;
होंसला जो बनाया मैंने खुदा ने मेरा साथ दिया ;
महकी हुई बहारों में मैंने ख़ुशी का एहसास किआ ;

वो साथी मिला मुझको मेरा हमसफ़र बनगया ;
पनौती को मिली तक़दीर जैसे मेरा वज़ूद मुझको मिलगया ;
भदति रही ज़िन्दगी युहीं उसके साथ चलता रहा ;
ख़ुशी से जीने लगा मैं वो ख़ुशी देता रहा ………………………………….

4 Comments

    • arushmakhija@gmail.com arushmakhija@gmail.com 24/06/2016
  1. C.M. Sharma babucm 24/06/2016
    • arushmakhija@gmail.com arushmakhija@gmail.com 25/06/2016

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