टी टी पी पी…….मनिंदर सिंह “मनी”

टी टी पी पी का हर तरफ शौर है,
निकल जाऊ मैँ आगे, इसी बात की सब में होड़ है,
दिखते नहीं इंसा, मशीनों में लगी हर तरफ दौड़ है,
पकड़ा ना जाये वो साध, वर्ना बाकी सब चोर है,
पीता नहीं कोई मद मधुशाला में, स्मैक,हेरोइन का हर तरफ कोढ़ है,
कैसे छोटा पहनू कपडा बदन पर ? इसी बात में गढ़ी सोच है,
क्या है उसकी थाली में ? हर किसी की हर रोज यही खोज है,
जलते है घर, लुटती है इज़्ज़त, सुलगते है अलफ़ाज़,
होगी त्राहि-त्राहि सुना था मैंने, क्या कलयुग का यही वो दौर है
टी टी पी पी……..

12 Comments

    • mani mani 24/06/2016
    • mani mani 24/06/2016
  1. C.M. Sharma babucm 24/06/2016
    • mani mani 24/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016
    • mani mani 24/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  4. mani mani 24/06/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016
    • mani mani 25/06/2016

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