हड्डी टूटीं बाएं की, शल्य दाएं का…

हड्डियां टूटीं बाएं की, शल्य दाएं का हो गया,
एक पैर पर चलता था, अब दोनों ही खो गया ।
सोच रहा हूँ अपना एक हाथ भी तुड़वा लूँ,
शल्य कराने जाऊं दूसरे से दामन छुड़वा लूँ ।
चार चिकित्सकों से मांग लूंगा विनम्र सहयोग,
अपने कन्धों पर पहुंचा, करवा दो अंतिम योग ।
टूट-फूट से सदा को मिल जाएगी मुक्ति,
चिकित्सकों का प्रयास और चिकित्सकीय युक्ति ।
ऐसे ही चिकित्सकों का खूब हो रहा भला,
आँख, गुर्दा किसी का, किसी का किडनी निकला ।
चिकित्सकीय खर्चा तो लेते हैं सब बढ़-चढ़,
तिसपर भी इलाज में करते हैं सब गड़बड़ ।
अंग निकाला लाखों आये, जिंदगी किसी की जाये,
मौसमी खांसी-खराश में,टी.बी.का इलाज हो जाये।
फीस ऊँची, दवा कमीशन, जांच जरूरी होती जाये,
जांचघर के चिरकुट पर बड़ा कमीशन बनकर आये।
मामूली भले हो बीमारी, दवा चलेगी लम्बी-भारी,
रिपोर्ट की तीमारदारी, अविश्वास अनुभव पर भारी।
भाग्य ने अगर साथ दिया, बीमारी ने निजात दिया,
दवा ने काम नहीं किया, ऊपरवाले ने हाथ दिया ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 24/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  4. mani mani 24/06/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 25/06/2016

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