तमाशा रिश्तों का

तमाशा रिश्तों का

गफलत में हम जी लेते हैं इस तरह
नफरत में पी लेते न जाने किस तरह ।
ये तो जिंदगी हैं जो अमानत है मेरी
फटे दिल को सी लेते हैं इस तरह ।
यादों के सहारे जी लेना बड़ी मुश्किल है
बेवफाओं के साथ रह पाऐंगे किस तरह ।
लोग करते खिलवाड़ अपने ही रिश्तों से
बदल गये लोग आज न जाने किस तरह ।
बातें करते और वादों से मुकर जाते हैं
तमाशा बन गये लोग आज किस तरह ।
साजिशों से बेहतर है दलदल मे फंस जाना
बंधन प्यार का अब लोग निभायेंगे किस तरह ।
दौलत के पीछे लोग आज क्यों कायल हो गये
नफरतों के बीच हम अब बच पायेंगे किस तरह ।

बी पी षर्मा बिन्दु

Writer Bindeshwar Prasad Sharma (Bindu)
D/O Birth 10.10.1963
Shivpuri jamuni chack Barh RS Patna (Bihar)
Pin Code 803214

13 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  2. babucm babucm 24/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  8. mani mani 24/06/2016
  9. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  10. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad Sharma (Bindu) 24/06/2016
  11. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016

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