मुसाफ़िर हूँ मैं ।

वस्ल-ओ-जुदाई का, ग़म न कर इतना,
मुसाफ़िर हूँ मैं, आना-जाना लगा रहेगा…!

वस्ल-ओ-जुदाई = मिलना-बिछड़ना;
ग़म = दुःख;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २३ जून २०१६.

MUSAFIR

13 Comments

  1. mani mani 24/06/2016
  2. babucm babucm 24/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 24/06/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/06/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/06/2016

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