वज्रपात

प्रथम बारिश का स्वागत करते,
जो तुम मन में खुशियां भरते,
आंधी-तूफां संग तुम भड़के,
आपस में ही लड़कर तड़के,
सैकड़ों की डूबा दी कस्ती,
घर-परिवार उजड़ी बस्ती,
ममता मिटी, मिटा खिलौना,
सिर भी लगता सूना-सूना,
कहीं मिटा कस्ती का खेवैया,
कहीं किसी बहना का भैया,
बिलखती दीवारें, घर-आँगन,
सूनी चौखट, सूना पनघट,
बदरा बरसे, बरसे नयना,
अब किससे और क्या है कहना ?
बाकी बचे, वो जीवन अनकट,
इससे तो बेहतर है मरघट ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

26 Comments

  1. mani mani 23/06/2016
  2. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 23/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/06/2016
  4. C.M. Sharma babucm 23/06/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 23/06/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 23/06/2016
  7. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 23/06/2016
  8. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  9. शुभम शर्मा 23/06/2016
  10. आदित्‍य 23/06/2016
  11. sarvajit singh sarvajit singh 23/06/2016
  12. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016

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